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VOL. 1, ISSUE 1 (2025)
गीता में जीवन मूल्य और नैतिकता
Authors
आशा रानी वर्मा
Abstract
श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय दर्शन और नैतिक शिक्षाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें जीवन के मूल्य, कर्तव्य, नैतिकता और सही व्यवहार का मार्गदर्शन प्रस्तुत किया गया है। गीता का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को अपने जीवन में कर्तव्यपरायणता, सत्यनिष्ठा, संयम और निष्काम कर्म के माध्यम से नैतिक जीवन जीना चाहिए।
गीता में जीवन मूल्य केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, न्याय, और दूसरों के प्रति करुणा और सम्मान को भी महत्व दिया गया है। अध्याय 2 और 3 में कृष्ण ने अर्जुन को कर्म और धर्म के महत्व को समझाया है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य का कर्तव्य केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति नहीं बल्कि समाज और धर्म की सेवा भी होना चाहिए।
इस शोध-पत्र में गीता के विभिन्न श्लोकों और शिक्षाओं का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जीवन मूल्य और नैतिकता गीता में व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के दोनों स्तरों पर मार्गदर्शक हैं। गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि आधुनिक जीवन के लिए नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है।
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Pages:19-21
How to cite this article:
आशा रानी वर्मा "गीता में जीवन मूल्य और नैतिकता". World Journal of Hindi, Vol 1, Issue 1, 2025, Pages 19-21
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