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VOL. 1, ISSUE 1 (2025)
मोहन राकेश की कहानी ‘मुखमुखी’ का पात्र-विश्लेषण
Authors
विपिन कुमार
Abstract
मोहन राकेश की कहानी ‘मुखमुखी’ एक गहरे मानवीय द्वंद्व और मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल का चित्रण करती है। कहानी के केंद्र में मुखमुखी नामक पात्र है, जो अपने आंतरिक संघर्षों और बाहरी दबावों से जूझता है। उसका जीवन सतही इच्छाओं और यथार्थ के बीच फंसा हुआ है, और कहानी के माध्यम से लेखक ने उसे समाज, परिवार और अपने अस्तित्व की खोज में उलझते हुए दिखाया है। राकेश ने मुखमुखी के माध्यम से यह संदेश दिया है कि मानव के अंदर की स्थिति—चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामाजिक—उसके निर्णयों और जीवन के मार्ग को प्रभावित करती है। इस पात्र का विश्लेषण करने पर हम पाते हैं कि वह न केवल अपनी आंतरिक दुनिया से जूझता है, बल्कि समाज के मानक और अपेक्षाओं से भी लगातार संघर्षरत है। कहानी में पात्र की मनोदशा, उसकी असमर्थता, और उसके संबंधों के विघटन को दर्शाया गया है, जो अंततः उसके व्यक्तित्व के कई पहलुओं को उजागर करता है।
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Pages:1-5
How to cite this article:
विपिन कुमार "मोहन राकेश की कहानी ‘मुखमुखी’ का पात्र-विश्लेषण". World Journal of Hindi, Vol 1, Issue 1, 2025, Pages 1-5
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